Nasir Siddiqui
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Sunday, December 18, 2016
इस अनमोल ख़ज़ाने को खोउँ कैसे ,
इस अनमोल ख़ज़ाने को खोउँ कैसे ,
तू बसा है ख्यालों में ,तो सोऊँ कैसे ,
दर्द रह रह के उठता है तेरी जुदाई का
अब तू ही बता तेरी याद में रोऊँ कैसे ,
दिल है के बेवफा तुझे मानता ही नहीं
मगर ये बेवफाई का दाग मैं धोऊं कैसे
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