I'm a Product

Wednesday, December 14, 2016

कुछ इस तरह से ज़िन्दगी गुज़ारा है मैंने

कुछ इस तरह से ज़िन्दगी गुज़ारा है मैंने
हर एक पल जैसे खुद को मारा है मैंने
हुआ है तन्हाई का एहसास जब भी मुझे
खुदा गवाह है बस तुम्ही को पुकारा है मैंने

मैंने शेरों के परदे में ग़मको बहुत छुपाया है

मैंने शेरों के परदे में ग़मको बहुत छुपाया है 
अक्सर ग़ज़लों ने मुझको बहुत रुलाया है 
छुप के अब कोहसारों में रोता हूँ मैं ज़ार ज़ार 
शहर के रफ़ीक़ों ने ,मुझको बहुत रुलाया है

सच्चाई हर मोड़ पे आज़माई गई है

सच्चाई हर मोड़ पे आज़माई गई है
,,सीता,, हर दौर में जलाई गई है

क्या है ताक़त प्यार में, ये आज़मा कर देख लेते

क्या है ताक़त प्यार में, ये आज़मा कर देख लेते
तूफ़ानों के बीच में तुम दिया जला कर देख लेते
ये माना दुश्वार बहुत है , ये जीवन भी लेकिन
जीवन के हसीं लम्हों को, मुसकुरा कर देख लेते

लगा दी है हमने,खुद पे ये दांव अब

लगा दी है हमने,खुद पे ये दांव अब
भर जाएँ चाहे मेरे, छालों से पाँव अब
मिटा के रहेंगे अब,उनकी हस्तियों को
अमन के दुश्मनों से, बचाएंगे गांव अब

सुरों में तुम खो जाओगे गुनगुना कर देखो

सुरों में तुम खो जाओगे गुनगुना कर देखो
नगमये वफ़ा एकबार तुम गा कर देखो
हटाओ ये माथे का शिकन आओ प्यार करें
कितनी हसीन है ये दुनिया मुस्कुरा कर देखो
मिलना या न मिलना ये मुक़द्दर की बात है
हाथ लेकिन एक बार तुम बढ़ा कर देखो
फिर उसके बाद तुम , मेरे ही हो जाओगे
मेरे इश्क़ को एकबार आज़मा कर देखो
ये ज़ुल्मतों के बादल सब छट जायेनंगे
उम्मीदों का तुम एक दिया जलाकर देखो
साहिल पे बैठ कर तुम क्या जान पाओगे
गहराई का अंदाजा गहराई में जा कर देखो

ये बहते हुए आँसु कभी तो मेरे काम आये

ये बहते हुए आँसु कभी तो मेरे काम आये 
मिल जाए वो मुझे कोई तो ऐसी शाम आये 
जपता हूँ दिनरात जिस के नाम की मैं माला
उसकी ज़ुबान पर भी कभी तो मेरा नाम आये