Nasir Siddiqui
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Wednesday, December 21, 2016
टूट के कुछ इस क़दर , चाहा हम ने तुझे
टूट के कुछ इस क़दर , चाहा हम ने तुझे
अब जलन है आँखों में और दर्द भी दोहाई दे
तू दूर भी है हमसे और पास भी लगे हमको
ये कैसा जादू है , के हर तरफ तू ही देखाई दे
अजनबी निगाहों से किस तरह देख लेता है तू
जैसे मुझे देखता है तू ,मुझे भी ऐसी बिनाई दे
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