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Sunday, December 18, 2016

इस अनमोल ख़ज़ाने को खोउँ कैसे ,

इस अनमोल ख़ज़ाने को खोउँ कैसे ,
तू बसा है ख्यालों में ,तो सोऊँ कैसे ,
दर्द रह रह के उठता है तेरी जुदाई का
अब तू ही बता तेरी याद में रोऊँ कैसे ,
दिल है के बेवफा तुझे मानता ही नहीं
मगर ये बेवफाई का दाग मैं धोऊं कैसे

जानां,एक बार तो आजाते

जानां,एक बार तो आजाते
कुछ सुनते और सूना जाते
तेरा रंग रूप सब मेरे लिए हैं
एक बार तो मुझको जता जाते
अब बीच हमारे मीलों का रस्ता
इन फासलों को तो मिटा जाते
दिल को क़रार तो मिल जाता
ख्वाबों में सही ,तुम आ जाते
ये घर गालियां सब रस्ता देखें
एक आस की डोरी बंधा जाते
जानां, एक बार तो आजाते

बीच मंझार में बन्दों का वो मदगार बना देता है

बीच मंझार में बन्दों का वो मदगार बना देता है
हमारा रब , तिनको को भी पतवार बना देता है
ऐतबार तो कर के देखो मेरे रब्बे करीम पर तुम
आतिशे नमरूद को भी, वो गुलज़ार बना देता है
देता है बे इन्तहा वो जब चाहे जिसे चाहे
लेने पे आये तो दरदर का तलबगार बना देता है

उनकी भी मुझपे नज़र तो होगी ?

उनकी भी मुझपे नज़र तो होगी ?
कोई तो ऐसी एक सहर तो होगी ?
मैंं तनहा सही पर कोई है मेरा भी
कभी न कभी उसे खबर तो होगी ?
ये जो ख़याल उनका मुझको इतना
कुछ उन्हें भी मेरी , फिकर तो होगी ?
ये मान लूँ मैं कैसे , के भूल गया वो
वफ़ा की मेरी कुछ, असर तो होगी 

Wednesday, December 14, 2016

हर वक़्त हर जगह बस तेरा ही चर्चा हो

हर वक़्त हर जगह बस तेरा ही चर्चा हो
खुदा करे के तू हर बलन्दी को छू आये
बसी है इस क़दर साँसों में तेरी मुहब्बत
याद करूँ तुझको तो आँखों से लहू आये 

लो ढल गया आफताब अब क्या होगा

लो ढल गया आफताब अब क्या होगा
कुछ तो कहिये जनाब अब क्या होगा
एक मुद्दत से मेरा चाँद बादल में छुपा था
खुल गया उसका नक़ाब अब क्या होगा 
छोड़ कर तेरी गली जाएँ तो जाएँ कहाँ 
तू ही बता , तेरा जवाब अब क्या होगा
कल तलक जो के गुड़ियों से खेला करती
अब आगया उस पे शबाब अब क्या होगा
दिल खोल के पिला आज मुझे ऐ साक़ी
छोड़ दे आज का हिसाब अब क्या होगा

फिक्रे मआश अब मुझे सोने नही देती

फिक्रे मआश अब मुझे सोने नही देती
अब इस दौर में जीना जेहाद हो जैसे
हर वक़्त मेरे सीने पे सवार रहती है
याद , तुम्हारी कोई जल्लाद हो जैसे
उन हसींन माज़ी को टटोलने लगता हूँ
ऐसा लगता है मुझे सब याद हो जैसे