I'm a Product
Thursday, December 22, 2016
Wednesday, December 21, 2016
सारे रंगों के बीच एक मैं ही था तनहा
सारे रंगों के बीच एक मैं ही था तनहा
सारे लोगों के बीच एक मैं ही था तनहा
सारे लोगों के बीच एक मैं ही था तनहा
बेमानी से लग रहे थे सब अलफ़ाज़ मेरे
उन इशारों के बीच एक मैं ही था तनहा
उन इशारों के बीच एक मैं ही था तनहा
चल ले चल अब अपनी नाव ले चलें
चल ले चल अब अपनी नाव ले चलें
समन्दर के उस पार अपने गांव ले चलें
बहुत दिन हुए अब हमें अकेला रहते
सपनों से अपने दूर इस शहर में रहते
चल तुझे फिर उस ठण्डी छाँव ले चलें
कुछ दिन तो जी ले अब अपना जीवन
अब राह निहारे तुम्हे अपना घर आँगन
हिम्मत कर उठा क़दम अब पाँव ले चलें
अपनी बूढी माँ के था आँख का तारा
तू ही तो था अब्बा के लाठी का सहारा
चल चूम ले जन्नत माँ के पाँव ले चलें
तूने देख लिए ये कैसे कैसे सपने
जहां पे न हों कोई भी अपने
फिर भी तू जिए जा रहा था
अपने आंसू पिए जा रहा था
चल फिर जहां है ठण्डी छांव ले चलें
वल ले चल अब अपनी नाव ले चलें,
समन्दर के उस पार अपने गांव ले चलें
बहुत दिन हुए अब हमें अकेला रहते
सपनों से अपने दूर इस शहर में रहते
चल तुझे फिर उस ठण्डी छाँव ले चलें
कुछ दिन तो जी ले अब अपना जीवन
अब राह निहारे तुम्हे अपना घर आँगन
हिम्मत कर उठा क़दम अब पाँव ले चलें
अपनी बूढी माँ के था आँख का तारा
तू ही तो था अब्बा के लाठी का सहारा
चल चूम ले जन्नत माँ के पाँव ले चलें
तूने देख लिए ये कैसे कैसे सपने
जहां पे न हों कोई भी अपने
फिर भी तू जिए जा रहा था
अपने आंसू पिए जा रहा था
चल फिर जहां है ठण्डी छांव ले चलें
वल ले चल अब अपनी नाव ले चलें,
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